वक्त तो है!

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Chandramohan Kisku

दक्षिन पूर्व रेलवे में कार्यरत चंद्रमोहन किस्कु की संताली भाषा में एक कविता पुस्तक "मुलुज लांदा"साहित्य अकादेमी दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है। वे संताली से हिंदी, हिंदी से संताली, बांग्ला से संताली में परस्पर अनुवाद करते हैं और अखिल भारतीय संताली लेखक संघ के आजीवन सदस्य हैं।
अब तो बच्चा छोटा है
खिलौना और मिठाई
से ही बहल रहा है
और तुम निःचिन्त होकर
काम कर पा रहे हो,
पर कल जब वह बड़ा होगा
स्कुल जाने लगेगा
और स्कुल से लौटकर
जब मांगेगा
पुरखों के समय की जंगल,
जब देखना चाहेगा
शेर, भालू, सियार आदि
तब तुम क्या करोगे?
उसकी मांग पूरी नहीं
कर पाओगे
तुम्हें शर्म महसुस होगी
जब वह जिद पकड़ेगा
पहाड़ पर चढ़ने की
देखना चाहेगा हरे पेड़
खुले में साँस लेना
चाहेगा,
झरने के ठन्डे पानी में
स्नान करना चाहेगा
तब क्या करोगे
सर को झुकाने के सिवा
अब तो वक्त है
बच्चा छोटा है
खोज सकोगे इसका समाधान?
दे सकोगे प्रश्नों के जवाब?
पहाड़-पर्वतों को बचा सकोगे?
भविष्य को सुनिश्चित कर सकोगे?
अब तो वक्त है
चाहोगे तो
कल बच्चों के प्रश्नों के जवाब
गुड़ घोलकर दे सकोगे
उसकी मांगें
प्यार के साथ दे सकोगे
अब तो वक्त है
बच्चा अभी छोटा है
रोपने से बीज

पेड़ तो बनेगा ही.


फोटो : recoverling

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Chandramohan Kisku

दक्षिन पूर्व रेलवे में कार्यरत चंद्रमोहन किस्कु की संताली भाषा में एक कविता पुस्तक "मुलुज लांदा" साहित्य अकादेमी दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है। वे संताली से हिंदी, हिंदी से संताली, बांग्ला से संताली में परस्पर अनुवाद करते हैं और अखिल भारतीय संताली लेखक संघ के आजीवन सदस्य हैं।

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