गोटूल: माडिया-कोईतुर समाज और जीवन दर्शन को समझने का एक बहुआयामी केंद्र

फ़ोटो : बस्तर में स्थित एक गोटूल (वेर्रिएर एल्विन, 1940) गडचिरोली और माडिया (कोईतुर) आदिवासी पहचान बताते हुए शहरी लोगों

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बस्तर के युवाओं की भागीदारी से सशक्त होता आदिवासी संघर्ष

एक तरफ पूरी दुनिया में पूंजीवादी व्यवस्थाओं ने अपनी सत्ता जमा के सभी संसाधनों पर कब्जा कर लिया है, वहीं

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‘क्या भारत देश का यही लोकतंत्र है?’: लिंगाराम कोड़ोपी का साथी युवाओं को पत्र

लिंगा राम कोड़ोपी बस्तर में स्थित एक पत्रकार हैं, जो आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों की घटनाओं पर सक्रीय रूप

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