झारखंड का 19 वां वर्षगांठ आदिवासियों के लिए क्या मायने रखता है?

अपनी अलग सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण और विख्यात झारखंड आज अपनी 19वीं वर्षगांठ मनाने में मग्न है.

Read more

छत्तीसगढ़ के मीडिया संस्थानों की पत्रकारिता आदिवासी विहीन: ब्राम्हणवाद के कब्ज़े में!

इस साल के अगस्त में गैर-सरकारी संगठन ऑक्सफैम और न्यूज़लांड्री मीडिया संस्थान ने “हु टेल्स आवर स्टोरीज मैटर्स” नामक एक

Read more

मानव पूँजी से हो सकता है एक बेहतर भविष्य का निर्माण

पूंजी को विभिन्न प्रकार से सोचा जा सकता है, जैसे – भौतिक पूँजी, वित्तीय पूँजी, सामाजिक पूँजी, प्राकृतिक पूँजी, मानव पूंजी इत्यादि| भौतिक

Read more

ईरानियों के ग्रंथ ‘जेंदावेस्ता’ में असुर, देवता और देवता राक्षस क्यों हैं?

भारत में असुर आदिवासी समुदाय के लोग हैं और वे खुद को महिषासुर के वंशज मानते हैं। उनका मानना है कि

Read more

“तुम आदिवासी हो मगर लगती तो नहीं हो”: शिक्षण संस्थानों में आदिवासी स्त्री संघर्ष

यह तीन भाग श्रृंखला का पहला लेख है। लेखिका नीतिशा आगामी दूसरे भाग में अपने जेएनयू के अनुभवों के बारे

Read more

वर्ल्ड इंडिजेनस डे : आखिर क्यों मना रहे हैं हम देशज भाषाओं का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष?

भाषाएँ हमारे रोज़मर्रा के जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाती हैं। हमारी भाषा हमारी सांस्कृतिक विविधता और पारस्परिक संवाद

Read more

बस्तर के युवाओं की भागीदारी से सशक्त होता आदिवासी संघर्ष

एक तरफ पूरी दुनिया में पूंजीवादी व्यवस्थाओं ने अपनी सत्ता जमा के सभी संसाधनों पर कब्जा कर लिया है, वहीं

Read more

जीतराई हाँसदा की गिरफ़्तारी: आखिर क्या है आदिवासियों में गौ-माँस भक्षण की परंपरा?

कोल्हान विश्वविद्यालय के कोपरेटिव कॉलेज जमशेदपुर में कार्यरत जीतराई हाँसदा को साकची, जमशेदपुर पुलिस ने शनिवार (25 मई) को गिरफ्तार

Read more