गाय-राजनीति और आदिवासी समुदाय : हर आदमी अपने ही पड़ोसी से डरा हुआ क्यों है?

मृतक प्रकाश लकड़ा की तस्वीर के पास बैठे उनके भाई पीटर लकड़ा, ग्रामीण बीरबल तिग्गा और जिनका बूढ़ा बैल मर

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लोकसभा चुनाव में डुवार्स तराई के आदिवासी, बागान श्रमिकों, के लिए क्या मुद्देै हैं दांव पर?

मुर्गा लड़ाई में मुर्गों की जिंदगी दाँव पर लगी होती है लेकिन मुर्गों के कल्याण हित की कोई बात नहीं

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भारतीय मूल का प्राकृतिक नववर्ष “पूनल सावरी”: डॉ सूर्या बाली “सूरज धुर्वे”

आइए आज आपको प्राकृतिक नववर्ष की बधाई देते हुए इसके इतिहास और वर्तमान स्वरूप की जानकारी भी दे दें। भारत

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सरनेम में क्या रखा है? उत्तर छतीसगढ़ के आदिवासियों के इतिहास पर चिंतन

जब मुझे पहली बार स्कूल में दाखिला कराया गया, तो मेरे माता-पिता ने मुझे “आकाश कुमार” नाम दिया, यह माध्यमिक शाला

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पैसों की राजनीति से जंगल, पहाड़ नहीं बच सकते : नियमगिरि की आवाज़

जंगलों और पहाड़ों के आदिवासी पहले से ही पुलिस छावनी और खनन कंपनियों के ख़िलाफ़ संघर्षरत हैं। वे पहाड़ों पर

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आदिवासी जीवन-दर्शन और वन अधिकार कानून: क्या है सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भविष्य?

फोटो : गणेश मांझी बस्तर और कुछ अन्य जगहों के आदिवासी, सीजन में पहली बार पकने वाले फल को नहीं

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कोयतूरियन जीवन दर्शन की सीख देता ‘छेर छेरता’ पुनेमी पाबुन

छेर छेरता पूनेमी पाबुन जनजातीय लोगों का बहुत ही प्राचीन उत्सव है । यह उत्सव आर्य आगमन के पूर्व से

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