कोरोना वायरस महामारी असन्तुलित पूंजीवाद की देन है ना कि चमगादड़: दयामनी बरला

COVID -19 या कोरोनावायरस महामारी ने विश्व भर में संकट की स्थिति पैदा कर दी है, जिसमें अब तक तीन लाख

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कोरोना लॉक डाउन में, बगैर वनोपज, छत्तीसगढ़ के आदिवासी कैसे बनेंगे आत्मनिर्भर?

विश्वव्यापी महामारी कोरोना के संकट से देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति गंभीर हो चुकी है. इस  अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने

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“बाज़ार न बंद है, जंगल तो नहीं”: कोरोना-लॉक डाउन में आदिवासी समाज

“बाजार तो बंद आहे लेकिन जंगल बंद तो नखे नि” (बाजार बंद होने से क्या हुआ, जंगल तो खुला है).

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सुन्हेरसिंह ताराम ने तीन दशक पुरानी पत्रिका “गोंडवाना दर्शन” से बदला कोइतुर-आदिवासी विमर्श

सन 1916, कोईतूर सामाजिक आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दौर की शुरुवात थी, जिसमें कोईतूर समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा

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बच्छराज कुंवर: छत्तीसगढ़ में आदिवासी देवता के ब्राह्मणीकरण का समाज कर रहा विरोध

छत्‍तीसगढ़ के घने जंगल प्राचीन दुनिया से जुड़े कई गहरे इतिहास संजोये हुए हैं। ऐसा ही एक इतिहास है उत्तर

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नियमगिरि: अस्पताल की जगह तेजी से खुल रही पुलिस छावनियां, हो रही अवैध गिरफ्तारी

ओड़िशा के कालाहांडी और रायगढ़ा जिले के बीच स्थित नियमगिरि में डोंगरिया कोंध आदिवासी इन दिनों तरह-तरह की मौसमी बीमारियों

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