सुकमा, छत्तीसगढ़ : “नक्सली” के नाम पर 15 आदिवासियों के एनकाउंटर की सच्चाई

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लिंगाराम कोडोपी


Photo : बायें- एनकाउंटर के बाद प्लास्टिक में लपेटी हुई लाशें और दायें – 2016 में गठन के समय DRG की टीम.


6 अगस्त को इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि, 5 अगस्त रविवार की रात को कोंटा (नुल्काटोंग गाँव) क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 15 नक्सलियों को मार गिराया गया और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। अवस्थी, एंटी नक्सल ऑपरेशन के डीजी ने बताया कि घटना स्थल से कई हथियार भी बरामद किये गए और यह ऑपरेशन डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड (DRG) और स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) के नेतृत्व में किया गया। ज्ञात हो कि DRG का गठन 2016 में किया गया था, जिसमें रणनीति बनाकर खासकर स्थानीय क्षेत्र और गोंडी भाषा जानने वाले आदिवासी युवाओं का चयन किया गया, जिसमें कई आत्मसमर्पण किये पूर्व नक्सल भी थे।

एनकाउंटर में मारे गए मृतकों की लाशें, जिनमें कई नाबालिक युवा युवती हैं. (फोटो – फेसबुक)
एनकाउंटर में मारे गए मृतकों की लाशें, जिनमें कई नाबालिक युवा युवती हैं. (फोटो – फेसबुक)

बस्तर में नक्सली के नाम पर सुरक्षा बलों द्वारा पिछले वर्षों में अनेक फ़र्ज़ी एनकाउंटर की घटनाएँ हुई हैं। 2016 में हिडमे का केस उनमें एक मुख्य घटना थी, जिसके खिलाफ आदिवासी नेत्री सोनी सोरी ने आवाज़ उठायी थी। 5 अगस्त की घटना भी कुछ ऐसी ही नज़र आती है।

आज जहाँ पूरा विश्व 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस की तैयारी करने में जुटा हुआ है, हमारे खुद के देश के आदिवासी/मूलवासी खतरे में हैं। पूरे विश्व भर में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक भारत देश को कहा जाता हैं। भारत में एक राज्य हैं जिसे छत्तीसगढ़ राज्य कहते हैं, इस राज्य में बस्तर संभाग हैं जहाँ मुलनिवासी यानी आदिवासी, माड़िया, मुरिया, गोंड, जंगलो में रहकर जीवन यापन करते है। इन मूलनिवासियों को भारत सरकार पुलिस प्रशासन के द्वारा नक्सली कहती हैं और आये दिन मारती है।

इसी तर्ज में, सोमवार की सुबह को 15 आदिवसियों को जिला सुकमा के मेहता पंचायत के चार गांव के आदिवासियों को मार दिया गया। इनमें

I) नुलकातोग गाँव से सात आदिवासी नाबालिक बच्चे थे –

  1. हिड़मा मुचाकी/लखमा
  2. देवा मुचाकी/हुर्रा
  3. मुका मुचाकी/ मुका
  4. मड़कम हुंगा/हुंगा
  5. मड़कम टींकू/लखमा
  6. सोढ़ी प्रभू/भीमा
  7. मड़कम आयता/सुक्का।

(इनके परिजनों के अनुसार इन सभी नाबालिगों की उम्र लगभग 14 – 17 वर्ष थी।)

II) ग्राम गोमपाड़ से

  1. मड़कम हुंगा/हुंगा
  2. कड़ती हड़मा/देवा
  3. सोयम सीता/रामा
  4. मड़कम हुंगा/सुक्का
  5. वंजाम गंगा/हुंगा
  6. कवासी बामी/हड़मा।

III) ग्राम किनद्रमपाड़ से

 1. माड़वी हुंगा/हिंगा।

IV) ग्राम वेलपोच्चा से

1. वंजाम हुंगा / नंदा।

ग्राम नुलकातोग से मड़कम बुधरी/रामा नाम की महिला को पैर में गोली मारी गई है और ग्राम वेलपोच्चा से वंजाम हुंगा/नंदा को पुलिस ने पकड़ा हैं और उन्हें इनामी नक्सली कह रही है। इनके अलावा और तीन युवकों को भी पुलिस द्वारा पकड़ा गया है। घटना के गवाहों के मुताबिक कई गांव वालों को पुलिस कर्मियों ने दौड़ा-दौड़ा कर मारा, जिनमे गर्भवती महिलाएं भी हैं। यह बात हमें तब पता चली जब मैं, सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी और रामदेव बघेल परिजनों से मिले और परिजनों ने अपनी पूरी व्यथा सोनी सोरी को सुनाई। चारों गाँव के ग्रामीणों का कहना हैं कि यह सारे ग्रामीण हैं और वहां कोई मुठभेड़ नहीं हुआ है।

यह वही ग्राम पंचायत मेहता है जहाँ ग्राम गोमपाड़ है। 14 जून 2016 को जहाँ मड़कम हिड़मे/कोसा की पुत्री का बलात्कार कर नक्सल के नाम पर उसे मार दिया गया था। इस घटना के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी द्वारा 9 अगस्त क्रांति के नाम पर 9 से 15 अगस्त तक गोमपाड़ ग्राम पहुँच कर देश के राष्ट्रीय ध्वज को लेकर पदयात्र किया गया और गोमपाड़ ग्राम में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। यह प्रकरण फिलहाल हाई कोर्ट बिलासपुर में है और अभी तक न्यायलय की और से कोई कार्यवाही और फैसला नहीं सुनाया गया है। इस गाँव के ग्रामीण आज भी मड़कम हिड़मे के न्याय के इंतजार में हैं। अब दुबारा इस घटना में इसी गाँव के सात ग्रामीणों को पुलिस ने मार दिया है। गाँव के ग्रामीणों को कोई कैसे विश्वास दिलाये की भारत देश का लोकतंत्र, सविधान,और कानून आदिवासी-मूलनिवासियों का रक्षक है?

एनकाउंटर में मारे गए मृतकों की प्लास्टिक में लपेटी गयी लाशें. (फोटो – फेसबुक)

आज उन आदिवासियों के लाशों की डॉक्टरों द्वारा शव परीक्षण के नाम पर जानवरों के मांस की तरह चीर फाड़ की जायेगी और पालीथिन में बाँध कर गाँव वालों को दे दिया जाएगा। गांव वाले कल से कोंटा आये हुए हैं और सड़को में सोए हैं। मृत्यु के दो दिन बाद भी आज शव लेने के लिए परिजन भटक रहे हैं, और यह भी अनिश्चित है कि कब तक उन्हें शव दिया जयेगा।

अगर हम जिला सुकमा के S.P. अभिषेक मीणा के बयान से संतुष्ट भी होते हैं तो उनका यह बयान काफी नहीं हैं, क्यूंकि गाँव के ग्रामीण कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। क्या जिला सुकमा S.P. स्वतंत्र जाँच के लिये तैयार हैं? अगर तैयार हैं तो वह हमें जाँच पड़ताल करने क्यों नहीं डे रही। जिला पुलिस प्रशासन द्वारा जाँच टीम को रोकना नहीं चाहिए। जब भी पुलिस गलत होती हैं तो रोक टोक होता हैं।

(फोटो – फेसबुक)

कल जब हम गाँव के पीड़ित ग्रामीण महिलाओं से मिलने पहुँचे तो महिलाओं ने बताया कि वे दो दिन से भूखे हैं तो हम उनके लिए खाने की सामाग्री लेने गये। जैसे ही हम उनके भोजन की व्यवस्था करने निकले सारे ग्रामीण महिलाओं को पुलिस वहां से उठा ले गयी। हम ग्रामीण महिलाओं को ढूढ़ते रह गए। पुलिस प्रशासन गलत नहीं हैं तो हमे मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा था। पुलिस कर्मी हमे बोल रहे थे कि आप इनके साथ बात नहीं कर सकते, फोटो खींच नहीं सकते, इतने में ही मुझे शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है। सच्चाई खुद बखुद सामने आएगी जब हम गाँव जाँच करने के लिए जायेंगे। अगर जिला पुलिस प्रशासन गलत नहीं हैं तो हमें रोकेगी नहीं।

कल 15 आदिवासियों को मार कर पालीथिन में लाया गया है। आज छोटे-बड़े अखबारों में बड़े-बड़े अक्षरों में सुकमा पुलिस प्रशासन को शाबाशी मिल रही हैं कि जिला सुकमा की पुलिस ने 15 नक्सलियों को मारकर बहुत ही गौरव-पूर्ण कार्य किया हैं। जिला सुकमा S.P. अभिषेक मीणा, डी। एम। अवस्थी ए.डी.जे. नक्सल ऑपरेशन, इन सभी पुलिस अधिकारियों को माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह शाबाशी दे रहे हैं। कुछ दिन बाद इन पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जायेगा। शायद मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को यह नहीं पता कि मरने वाले नक्सली नहीं बल्की मासूम आदिवासी युवा, युवती हैं।

सोनी सोरी परिजनों से बात करते हुए. (फोटो – लिंगाराम कोडोपी)

पूरे भारत मे राष्ट्रवाद खतरे में हैं। राष्ट्रवाद का क्या अर्थ हैं? क्या राष्ट्रवाद में भारत देश के आदिवासी नहीं आते? B.J.P. की सरकार पूरे भारत में राष्ट्रवाद को समाप्त करना चाहती हैं और R.S.S. का गुंडाई साम्राज्य स्थापित करना चाहती हैं। क्या पूरे भारत के बुद्धिजीवी वर्ग देश मे धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रवाद, को समाप्त करने में B.J.P. की मदद करेंगे या बदलाव के लिए सरकार से सवाल करेंगे?

9 अगस्त को आदिवासी दिवस भारत देश और विश्व भर में मनाया जाएगा और सुकमा जिले के चार गाँव गोमपाड़, किन्द्रेमपाड़, नुलकातोग, वेलपोच्चा, के आदिवासी 15 आदिवासी युवा युवतियों के मरने का मातम में रहेंगे। क्या ये गाँव और नक्सल के नाम पर मारे गए आदिवासी आपके समुदाय के नहीं है? क्या ये गाँव आपके नहीं हैं? आप सब आदिवासी दिवस किसके साथ मना रहे हैं? आप उस सरकार के साथ मना रहे हैं जो आपके समाज, समुदाय, और लोगों को नक्सल के बहाने से मार रही हैं। आज भारत देश में आठ से नौ करोड़ आदिवासी, मूलनिवासी जीवन यापन कर रहे हैं। देश के छत्तीसगढ़ राज्य में आदिवासी दिवस राज्य सरकार के प्रतिनिधित्व में रायपुर में मनाया जा रहा हैं। जिसका प्रतिनिधित्व केबिनेट मंत्री मा। केदार कश्यप, मा। विकास मरकाम उपाध्यक्ष अनु।जनजाति आयोग, मा। नंदकुमार साय अध्यक्ष राष्ट्रीय जनजाति आयोग, इनके अलावा कई आदिवासी नेता हैं जो कि इस दिवस का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं।

इनमें कुछ नेता B.J.P. के हैं जो आदिवासियों की दलाली करते हैं। इन सभी नेताओं को पता है कि आदिवासियों के साथ क्या हो रहा हैं लेकिन वे जान बूझकर आँख मूंदे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के आदिवासी नेता B.J.P. और R.S.S. के गुलाम बन चुके हैं। आठ करोड़ आदिवासियों में कुछ तो शिक्षित आदिवासी युवा हैं। अगर आदिवासी समुदाय और मूलनिवासी समाज की रक्षा के लिए यह सामने आए तो समाज में हो रहे अन्याय को रोका जा सकेगा।

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Lingaram Kodopi

Ligaram Kodopi is an Adivasi journalist, documentary film maker based in Bastar, Chhattisgarh.

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