मातृभाषा की मौत.

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Jacinta Kerketta

Jacinta is a freelancer journalist, poet from Ranchi, Jharkhand. She belongs to Kurukh/Oraon community. Her poem collection titled "Angor" was published in 2016 by Adivaani Publications. Her second poetry collection is "Land of the Roots" published by Bhartiya Jnanpith, New Delhi in 2018.

रांची, झारखंड से, जसिंता एक स्वतंत्र पत्रकार और कवि हैं। वह कुरुख / उरांव समुदाय से हैं। "अंगोर" शीर्षक से इनकीकविता संग्रह 2016 में आदिवाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हुई थी। 2018 में प्रकाशित इनकी दूसरी कविता संग्रह "जड़ों की जमीन" है जो भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई है।

मातृभाषा की मौत

मां के मुंह में ही
मातृभाषा को कैद कर दिया गया
और बच्चे
उसकी रिहाई की मांग करते करते
बड़े हो गए।

मातृभाषा खुद नहीं मरी थी
उसे मारा गया था
पर, मां यह कभी न जान सकी। 

रोटियों के सपने
दिखाने वाली संभावनाओं के आगे
अपने बच्चों के लिए उसने
भींच लिए थे अपने दांत
और उन निवालों के सपनों के नीचे
दब गई थी मातृभाषा।

मां को लगता है आज भी
एक दुर्घटना थी
मातृभाषा की मौत….।


Picture Courtesy: Jacinta Kerketta

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Jacinta Kerketta

Jacinta is a freelancer journalist, poet from Ranchi, Jharkhand. She belongs to Kurukh/Oraon community. Her poem collection titled "Angor" was published in 2016 by Adivaani Publications. Her second poetry collection is "Land of the Roots" published by Bhartiya Jnanpith, New Delhi in 2018. रांची, झारखंड से, जसिंता एक स्वतंत्र पत्रकार और कवि हैं। वह कुरुख / उरांव समुदाय से हैं। "अंगोर" शीर्षक से इनकी कविता संग्रह 2016 में आदिवाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हुई थी। 2018 में प्रकाशित इनकी दूसरी कविता संग्रह "जड़ों की जमीन" है जो भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई है।

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