बस्तर में आदिवासियों के फर्जी मुदभेड़ का सिलसिला जारी: दो और मामले आये सामने

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Tameshwar Sinha

तामेश्वर सिन्हा बस्तर में स्थित एक सक्रीय युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में रायपुर अग्रसेन कॉलेज में (BJMC मास्टर डिग्री) पत्रकारिता की पढाई कर रहे हैं और पत्रकारिता के माध्यम से समाजसेवा का उद्देश्य लेकर चल रहे हैं।

तामेश्वर के ब्लॉग को यहाँ देखें : http://bastarprahri.blogspot.in


न्यायालय से बरी आदिवासी युवक बालसिंह को पुलिस ने नक्सली बता कर फर्जी मुठभेड़ में मार डाला। छत्तीसगढ़ के बस्तर में फर्जी मुठभेड़ में आदिवासियों की निर्मम हत्या का अंतहीन सिलसिला जारी है। ताजा घटना 25 नवम्बर को मर्दापाल थाना क्षेत्र अंतर्गत बावड़ी के जंगल की है। जहाँ बस्तर आईजी शिव राम प्रसाद कल्लूरी के नेतृत्व में चलाये जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस ने जिस कथित मुठभेड़ में वर्दीधारी नक्सली को मार गिराने का दावा किया था; वह भी फर्जी निकला। ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने आरोप लगाया है कि मर्दापाल थाना अंतर्गत छोटे कोड़ेर निवासी ‘बालसिंह शोरी’, पिता रामधर को पुलिस छोटे कोड़ेर में उसके घर से निकालकर बांसगांव ले गई। जहाँ पुलिस ने कथित मुठभेड़ में नक्सली बताकर मार दिया। पुलिस बांसगांव में ही पंचनामा तैयार कर शव को पुलिस मुख्यालय ले आई। पुलिस इस आदिवासी युवक को कथित मुठभेड़ में नक्सली बताकर मारने का दावा कर रही थी। लेकिन इसकी जो सच्चाई सामने आ रही है वह रौंगटे खड़े कर देने वाली है, जिसे सुनकर किसी का भी पुलिस पर भरोसा उठ जायेगा।

यह बालसिंह शोरी की कहानी है जो जुलाई 2016 में न्यायालय से बरी हुआ था। परिवार के अनुसार बालसिंह शोरी अपने निवास छोटे कोड़ेर में पत्नी चाचाडी, एक ढाई साल का बच्चा, एक दूध मुंही आठ माह की बच्ची के साथ अपना जीवन अभाव में जैसे-तैसे गुजार रहा था। लेकिन इनके इस जीवन को भी इस हत्यारी सरकार की बुरी नजर लग गई। जंगलों में कष्टप्रद जीवन जी रहे उसके परिवार पर पुलिस का आतंक अचानक बरस पड़ा, जब सर्चिंग पर निकली पुलिस की टीम बाल सिंह को 24 नवम्बर 2016 को रात 9 बजे घर से उठा कर ले गई और दुसरे दिन सुबह बांसगाँव में उसे गोली मार दी।

पुलिस बॉसगांव में ही शव का पंचनामा और बांसगाँव के सरपंच से शव का शिनाख्त करवाकर कोंडागाँव जिला मुख्यालय ले आई। परिजनों के खोजबिन करने पर छोटे कोड़ेर के कोटवार ने पुलिस मुख्यालय परिवार जनों को जाने के लिए कहा, जहाँ पुलिस ने स्वयं गाड़ी व्यवस्था कर बालसिंह का शव देकर परिवार के लोगों को वापस भेज दिया। ग्रामीणों और आदिवासी समाज के लोगों को इस बात की जानकारी मिलने पर पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ में मारने गिराने के दावे को फर्जी करार देते हुए विरोध होने लगा है। 
जानकारी के अनुसार पुलिस ने अप्रेल 2016 में बालसिंह शोरी को नक्सली वारदातों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तीन महीने जेल में रहने के बाद जुलाई 2016 में बालसिंह शोरी को तथ्य नहीं होने पर न्यायालय से बरी किया गया था। इसी नवम्बर की 25 तारीख को पुलिस ने कथित मुठभेड़ में नक्सली बता कर मार दिया। इससे पहले भी पुलिस ने दरभा ब्लाक में अर्जुन नामक आदिवासी युवक को न्यायालय से बरी होने के बाद नक्सली बता कर फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था।

फर्जी मुठभेड़ को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन


बालसिंह शोरी को नक्सली बताकर कथित मुठभेड़ में मारे जाने को लेकर ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मर्दापाल क्षेत्र के हजारों ग्रामीण चार दिन पुराने आदिवासी युवक की शव को बिना अंतिम संस्कार किए कोंडागांव मुख्यालय लेकर परिवार सहित विरोध प्रदर्शन करने आ रहे थे। जिन्हें मर्दापाल थाने में ही रोक लिया गया। 28 नवम्बर को ग्रामीण शव को साथ लेकर प्रदर्शन करने जा रहे थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसी बीच पुलिस ने बालसिंह शोरी के शव को छुपाने की कोशिश भी की और शव को मर्दापाल थाने अंदर ले गए। भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम विरोध स्थल पहुँचे और पुलिस के चंगुल से शव को बाहर निकाल फर्जी मुठभेड़ का विरोध करते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर के लिए डटे रहे।

आदिवासी छात्र भी फर्जी मुठभेड़ को लेकर विरोध में आए सामने
जानकारी के अनुसार बालसिंह का भतीजा पढाई कर रह है। जब पुरे घटनाक्रम की छात्रों को जानकारी मिली तो छात्रों ने पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों ने कहा कि दोषी पुलिस वालों का नाम उजागर कर हत्या का मुकदमा चलाया जाए। सरकार आदिवासियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या बंद करे। कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम ने बताया कि मैं मर्दापाल विरोध स्थल पर मौजूद था, ग्रामीण अर्थी को लेकर जब फर्जी मुठभेड़ में नक्सली बता के मारने का विरोध कर रहे थे उस वक्त पुलिस ने शव को छुपा दिया था। पुलिस के आला अफसरों के बातचित के बाद शव को ग्रामीणों को सुपुर्द किया गया। मोहन मरकाम ने यह भी कहा कि पुलिस बेगुनाहों को मार रही है। कौन नहीं चाहता बस्तर में नक्सलवाद समाप्त हो, लेकीन यहाँ तो पुलिस आदिवासी समाप्त करने में लगी है। अपने पद में वृद्धि के लालच में पुलिसवाले बेगुनाह आदिवासियों की हत्या नक्सलियों के नाम पर करवा रहे है। पुरे मामले को लेकर मरकाम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।


दुसरे मामले में  कोयलीबेड़ा में भी फर्जी मुठभेड़ में आदिवासी की हत्या

बस्तर में फर्जी मुठभेड़ में आदिवासियों की हत्याओं के नित नए आरोप बस्तर रेंज के पुलिस अफसरों पर लग रहे हैं । जिन्हें छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार से अभयदान मिला हुआ है । छत्तीसगढ़ सरकार के बस्तर रेंज आईजी शिव राम प्रसाद कल्लूरी पर लगे तमाम आरोप बताते हैं कि इनका फर्जी मुठभेड़ों से चोली-दामन का साथ रहा हैं । लगातार सामने आ रहे फर्जी मुठभेड़ के मामलों में नया मामला कोयलीबेड़ा अंचल से सामने आया है । एक महिला आरोप लगाते हुए कह रही है कि, “मेरे पति 10 नवम्बर 2016 को रस्सी (जंगली) लेने जंगल गए हुए थे। शाम को वे घर नहीं लौटे, पुलिस वालो ने उन्हें मार डाला । वे तीन वर्षो से कोयलीबेडा डूटा समिति में तेंदूपत्ता फंड मुंशी का काम कर रहे थे। इस बात के सबूत भी है। मेरे पति की हत्या के बाद शव को पुलिस ने दो दिन बाद वापस किया। उनका आधार कार्ड और परिवार का राशन कार्ड भी है । वे किसी भी प्रकार की नक्सली गतिविधियों में शामिल नहीं रहते थे। पुलिस द्वारा मेरे पति को नक्सली बता कर मार दिया गया हमें न्याय दिलाइये ।”

यह न्याय की गुहार कोयलीबेड़ा ब्लाक के केसेकोड़ी पंचायत अंतर्ग्रत ग्राम गट्टाराल से सावित्री कवाची लगा रही है । उसके पति शोभा राम कवाची को 11 नवम्बर को बीएसएफ  ने ग्राम गोमे के पास मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शोभा राम कवाची पानीडोबीर एलओएस सदस्य था। जिसे मुठभेड़ में गोली बारी के दौरान मारा गया। शोभा राम कवाची की पत्नी सावित्री कवाची पुलिस पर आरोप लगा रही है कि पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ कर उसके पति को नक्सली बता के मार दिया। वह जंगल में रस्सी लेने गया हुआ था, जहाँ पुलिस ने उसे गोली मार दी ।

सवित्री ने पति को न्याय दिलाने की गुहार लगाते हुए कोयलीबेड़ा के समस्त सरपंच प्रतिनिधि, जनपद प्रतिनिधि, एवं जिला पंचायत सदस्य को पत्र लिख कर न्याय की मांग की है।

 कल्लूरी ने  कथित मुठभेड़ में मारने पर दिया था ईनाम

मिली जानकारी के अनुसार बस्तर आई शिव राम प्रसाद कल्लूरी ने शोभा राम कवाची को कथित मुठभेड़ जिसे उसकी पत्नी ने फर्जी करार दिया है में मारने पर जवानों को पुरस्कृत किया था। शोभा राम कवाची की पत्नी सवित्री ने अपने पति को किसी भी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप को ख़ारिज करते हुए पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते न्याय की गुहार लगाई है।

फोटो: तमेश्वर सिन्हा

तेंदूपत्ता फड़ मुंशी के कार्य करने का भी है रिकॉर्ड

जानकारी के अनुसार शोभा राम कवाची का फड मुंशी में काम करने का रिकॉर्ड है, वह ग्रामीण तेंदुपत्ता संग्रहणकर्ता था। जिसे पुलिस नक्सली बताकर कथित मुठभेड़ में मार दिया गया। सवाल तो उठेगा ही कि जब वह एक तेंदुपत्ता संग्रहणकर्ता (फड़ मुंशी) था तो नक्सली गतिविधियों में कैसे शामिल हो सकता है ?

कल कोयलीबेडा के 17  पंचायतों की रैली

सवित्री के पंचायत प्रतिनिधियों को पत्र लिखने के बाद, सभी प्रतिनिधियों ने घटना स्थल जहाँ बीएसएफ ने शोभा राम कवाची को मारा था। वहाँ जाकर वस्तुस्थिति पता लगाया। सवित्री ने जन प्रतिनिधियों को सारे रिकॉर्ड दिखाए। जिसके बाद कल 17 पंचायतों के प्रतिनिधि और ग्रामीण फर्जी मुठभेड़ो और अन्य समस्याओं को लेकर कांकेर कलेक्टर के नाम कोयलीबेड़ा तहसीलदार को ज्ञापन सौपेंगे। इस क्षेत्र के सारे जान प्रतिनिधि कथित नक्सली बताकर मुठभेड़ में मारे गए शोभा राम की न्याय की गुहार लगायेंगे ।

 

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तामेश्वर सिन्हा बस्तर में स्थित एक सक्रीय युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में रायपुर अग्रसेन कॉलेज में (BJMC मास्टर डिग्री) पत्रकारिता की पढाई कर रहे हैं और पत्रकारिता के माध्यम से समाजसेवा का उद्देश्य लेकर चल रहे हैं। तामेश्वर के ब्लॉग को यहाँ देखें : http://bastarprahri.blogspot.in

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