तेलंगाना की जनजाति ‘थोटी’ की कल्याणी ने रचा इतिहास

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अनंत प्रकाश 

यह लेख पहले BBC, 27 अगस्त 2017 में प्रकाशित  हो चुका है. 


17 साल की कल्याणी तेलंगाना की विलुप्त होती जनजाति ‘थोटी’ से आती हैं. उनकी जनजाति से किसी लड़की ने आज तक यूनिवर्सिटी में कदम नहीं रखा है.

लेकिन चाखटी राम बाई की बेटी कल्याणी आर्थिक तंगी से लेकर सामाजिक पिछड़ेपन की बाधाओं को धता बताकर देश के इंजीनियरिंग संस्थान जवाहरलाल नेहरू टेक्निकल यूनिवर्सिटी में दाख़िला ले चुकी हैं.

कल्याणी का परिवार. (फोटो – C H KRISHNA)

तो हार क्यों मानूं?

बीबीसी से बात करते हुए कल्याणी ने अपने अब तक के सफ़र की उन यादों को साझा किया है जो उनके यहां तक पहुंचने में उनकी साझेदार रहीं.

कल्याणी कहती हैं, “कोई भी बस इसलिए क्यों हार मान ले कि वह लड़की है. मैं अपनी जनजाति की पहली लड़की हूं जो यूनिवर्सिटी में पढ़ने आई है. मैं अपनी जनजाति की पहली लड़की हूं जो इंजीनियर बनने जा रही हैं. ये एक सपने के सच होने जैसा है. मैं बहुत खुश हूं जो यहां तक पहुंच पाई हूं.”

कल्याणी ने पढ़ाई के लिए छठी क्लास से अपना घर छोड़ दिया था.

यूनिवर्सिटी तक पहुंचने के सफ़र को याद करते हुए कल्याणी कहती हैं, “गांव में मेरा घर बहुत छोटा था. मेरे पिता मजदूरी करते हैं. फ़िर भी मैं छठी क्लास से अपने घर वालों से अलग होकर घर से दूर पढ़ने आ गई. मैं हॉस्टल में रहती थी. एक लड़की होने के नाते कई समस्याएं झेलीं. लेकिन सबसे बड़ी समस्या तो पीने के पानी को लेकर थी. पीने का पानी तक नहीं आता था.”

‘अपने लोगों के लिए बनना है वैज्ञानिक’

थोटी जनजाति के बारे में एक कहावत है, “थोटी की तरह मेहनत से काम करो तो राजा के सुख पाओ.”

कल्याणी ने अपनी आंखों से अपने लोगों को रोज़मर्रा की समस्याएं झेलते देखा है और इन्हीं दिक्कतों का हल निकालने के लिए वो वैज्ञानिक बनना चाहती हैं.

अपने गांव-घर के बारे में बात करते कल्याणी थोड़ा उदास हो जाती हैं.

फ़िर कल्याणी खुद को संभालते हुए कहती हैं, “मेरे गांव में किसान बहुत परेशान हैं. वे बहुत दिक्कतों का सामना करते हैं. इसीलिए मैं इंजीनियर बनना चाहती हूं ताकि मैं अपनी पढ़ाई से उनकी जिंदगी थोड़ी आसान बना सकूं.”

‘खुद पर करो भरोसा’

लेकिन फ़िर कल्याणी आत्मविश्वास से कहती हैं, “मैं इंजीनियर और वैज्ञानिक बनने के बाद अपने गांव ही वापस जाऊंगी. ताकि अपने लोगों की जिंदगियों में कुछ दुश्वारियां कम कर सकूं.”

थोटी जनजाति की महिलाओं को पारंपरिक रूप से गोदना (टैटू) बनाने की कला में महारथ हासिल हुआ करती थी.

लेकिन धीरे-धीरे इस जनजाति की महिलाओं ने भी खेतिहर मजदूरी को अपना लिया है.

कल्याणी अपनै जैसी लड़कियों से कहना चाहती हैं, “किसी भी लड़की को किसी भी चीज़ से डरना नहीं चाहिए. उनके अंदर वो सब कुछ करने का साहस होता है जो सब कुछ वो करना चाहती हैं. मैं एक लड़की के रूप में पैदा हुई हूं. इसमें मैं क्या कर सकती हूं. लड़की होने की वजह से सामने आने वाली समस्याओं के बारे में तो सोचो ही मत. इस दुनिया में तमाम समस्याएं हैं. बस लगकर मेहनत करो. अपने हाथों पर भरोसा करो. किसी और पर ज़रा भी निर्भर मत हो. और, अपने कंधों पर उठाओ अपनी जिम्मेदारी और कहो कि मैं ये कर सकती हूं.”

स्टार 30 योजना की मदद से इंजीनियरिंग प्रवेश परिक्षाओं में परचम लहराने वाले जनजातीय छात्र. (फोटो : SRINIVAS SWAMY)

बेटियों की जिम्मेदारी

कल्याणी बेटियों के मां-बाप से खास तौर पर कहना चाहती हैं कि बेटियों को उनकी जिम्मेदारी उठाने दें, उन पर भरोसा करें और अपने मन से सारे डर निकाल दें.

अपने पिता के बारे में बात करते हुए कल्याणी कहती हैं, “मेरे पिता चाख़टी कृष्णा मेरी जिंदगी के हीरो हैं. वह खुद कक्षा 10 तक पढ़े हैं लेकिन उन्होंने बचपन से मुझे इंजीनियर बनने के लिए प्रोत्साहित किया.”

तेलंगाना में बीते दो सालों से कल्याणी की तरह जनजातियों से आने वाले लड़के-लड़कियां कई बाधाओं को पार करके देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश पा रहे हैं.

एकीकृत आदिवासी विकास एजेंसी के तहत साल 2015 में शुरू हुई स्टार्स 30 योजना आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की प्रतिभा को निखारने की दिशा में काम कर रही है.

सुपर-30 के तर्ज पर…

इस योजना को शुरू करने वाले मंचेरियाल जिले के डीएम आर वी करनान कहते हैं, “कल्याणी एक आदिम जनजाति थोटी से आती हैं जिसमें अब सिर्फ़ ज्यादा से ज्यादा छह हजार लोग बचे हैं. और कई असमानताओं से जूझते हुए इस लड़की ने इंजीनियरिंग एग्रीकल्चर मेडिकल कॉमन इंटरेंस टेस्ट पास किया.”

उन्होंने बताया, “हमने बिहार के सुपर 30 से प्रेरणा लेकर स्टार 30 योजना शुरू की. पहले बच्चे पढ़ाई के लिए हैदराबाद जाते थे. लेकिन पिछड़े वर्गों के बच्चे हैदराबाद तक नहीं पहुंच पाते थे. ऐसे में हमने यह योजना शुरू करके 10 जनजातियों से मेधावी बच्चों को चुनकर उन्हें आदिलाबाद में ही दिल्ली और अन्य शहरों के उच्च कोचिंग संस्थानों जैसे नोट्स और मॉकटेस्ट्स उपलब्ध कराना शुरू किए.”

निशुल्क आवासीय शिक्षण सुविधा देने वाली ये स्कीम साल 2017 में स्टार 30 योजना छह जनजातिय छात्रों को आईआईटी जेईई क्वालिफ़ाई करने में मदद कर चुकी है.

 

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