ग्राम सभा की सहमति के बगैर, सरकार दे रही माइनिंग कंपनियों को जमीन

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दंतेवाड़ा पूरा बस्तर संभाग, पांचवी अनुसूचि क्षेत्र में होने के बावजूद भी ग्राम सभा की अनुमति के बगैर गाँव की जमीनों को सरकार लीज पर दे रही है। मामला बस्तर संभाग का है जहाँ हाल ही में दंतेवाडा जिले के ग्राम – आलनार (तहसिल – बड़े बचेली, ग्राम पंचायत – गुमियापल) पर स्थित एक बड़े पहाड़ में कुछ लोगों का एक दल गया हुआ था। जब गांव के लोगों ने उनसे पूछताछ की तब उन्हें बताया गया कि वे सर्वे करने के लिए आये हुए हैं। ज्ञात है कि आरती स्पंज कंपनी, रायपुर को माइनिंग करने के लिए गाँव की जमीन सरकार ने लीज पर दिया है। तब गाँव के लोगो को एहसास हुआ कि सरकार ने गाँव की अनुमति के बैगर उनकी जमीन किसी कम्पनी को दे दी है।

जमीन का पूरा विवरण रकबा 31.55 हेक्टयर खसरा नंम्बर 416, 417 एवं 418 आयरन ओर माईनस मेसर्स आरती स्पंज कम्पनी, रायपुर को लीज आबंटित हो चुका है जो की ग्राम वासियो के बगैर सहमति से किया गया है। ग्राम आलनार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के तहत पांचवी अनुसूची छेत्र है जहाँ अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) को स्वशासन प्रशासन व नियंत्रण का पूर्ण आधिकार है। साथ ही माननीय उच्चतम न्यायालय के समता का पैसला 1997 के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रो में माइंस व मिनरल्स का लीज अनुसूचित जनजातियों को ही दिया जा सकता है। माननीय उच्च न्यायालय के फैसले ‘पी. रमी रेड्डी 1988’ के अनुसार  अनुसूचित क्षेत्र की जमीन किसी भी गैर आदिवासी को हस्तांतरित नहीं की जा सकती।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 (1) कंडिका (5) के तहत लोकसभा या विधान सभा द्वारा बनाया गया कोई भी सामान्य कानून अनुसूचित क्षेत्रो में सीधे लागू नही हो सकता। इसीलिये इन अनुसूचित क्षेत्रो में उपरोक्त प्रावधानों के रहते हुए भूमि आधिग्रहण व खनन से सबधित कोई भी कानून सीधे लागु नही किया जा सकता। उन्हें पारंपरिक ग्राम सभा (भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 (3)(क) विधि के बल) की अनुमति  के बिना कोई भी सामान्य कानून लागू करना, भूमि अधिग्रहण करना, गैर आदिवासी  या बाहरी व्यक्तियों की कंपनियों को खनिज खनन का लीज व ठेका देना असवैधानिक है।  इन संवैधनिक नीतियों को समस्त गाँव के गायता पेरमा सिरहा, पुजारी, पांच सरपंच और गांव के मुखिया ने ग्राम सभा आयोजित कर मेसर्स आरती स्पंज कम्पनि रायपुर को लीज देने के सख्त विरोध में प्रस्ताव पारित कर  विरोध किया है।


जिसमें महामहिम राष्ट्रपति, भारत सरकार – नई दिल्ली ,माननीय मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया – नई दिल्ली, महामहिम राज्यपाल महोदय – छत्तीसगढ़ शासन और माननीय राष्टीय अनुसूचित जनजाति आयोग – नई दिल्ली को प्रतिवेदन की प्रतिलिपि तहसीलदार, तहसील कार्यालय  – बड़े बचेली में ज्ञापन दिया गया है। बहुत सारे ऐसे मामले हैं जिनमें सरकार ने बिना गांव के अनुमति के बगैर उद्योगपतियो को जमीन लीज पर दे रखा है। गौरतलब है कि इसी प्रकार रावघाट परियोजना के लिए सरकार द्वारा गांव से जमीन अधिग्रहण किया गया। यह घटनाएँ सरकार की निरंतर असंवैधानिक गतिविधियों की श्रंखला में एक नया उदाहरण है और आदिवासियों के प्रति उदासीनता को दिखाता है।  

 

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Mangal Kunjam

Mangal is a journalist from Koitur community and a native of Kirandul village, Dantewada. He writes on issues concerning Adivasis in Southern Chhattisgarh.

One thought on “ग्राम सभा की सहमति के बगैर, सरकार दे रही माइनिंग कंपनियों को जमीन

  • January 9, 2019 at 8:08 am
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    Great sumit bhai,or gram basi gumiyapal chattiesgarh ko mera sat sat naman,
    Jo apne adhikaro ke liye lard rehe hai.

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