कान्हू और कास्त्रो के तीर

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Jacinta Kerketta

Jacinta is a freelancer journalist, poet from Ranchi, Jharkhand. She belongs to Kurukh/Oraon community. Her poem collection titled "Angor" was published in 2016 by Adivaani Publications. Her second poetry collection is "Land of the Roots" published by Bhartiya Jnanpith, New Delhi in 2018.

रांची, झारखंड से, जसिंता एक स्वतंत्र पत्रकार और कवि हैं। वह कुरुख / उरांव समुदाय से हैं। "अंगोर" शीर्षक से इनकीकविता संग्रह 2016 में आदिवाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हुई थी। 2018 में प्रकाशित इनकी दूसरी कविता संग्रह "जड़ों की जमीन" है जो भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई है।

कान्हू और कास्त्रो के तीर

सबकी नसों में रक्त बह रहा
फिर कुछ की नसों में
क्यों बह रहा रक्त के साथ
थोड़ा क्रोध, थोड़ा प्रतिरोध ?

कोई नहीं पूछता, क्यों?
कोई यह भी नहीं कहता
क्यों किसी की पीठ पर चुपचाप
टंगी तीरों की धड़कनें
इतना शोर करती हैं कि
बारूद के सीने में भी खौफ भर आता है..?

आड़े-टेढ़े हाथों की अंगूलियां
हवा में तीर चला रहीं हैं,
तीरों ने भी समझ लिया है
इसलिए अपने चेहरे पर जमे
सन् 1855 के
रक्त की छींटों को पोंछते
घर की भीतरी दीवारों पर
युगों से टंगे तीर अचानक
बहाने लगते हैं आंसू
फिदेल के चले जाने पर,

कान्हू और कास्त्रो के समय की
कमान से निकले तीर
आज भी हैं एक लंबी यात्रा पर
जो देखते हैं रास्ते भर
नारों और वादों की पुतलियों में
छिपी शैतानी हरकतें,
उसकी बेहयायी हंसी
और पत्थर पर खुद को रगड़े बिना
हो उठते हैं और भी नुकीले।
निकल पड़ने को एक साथ
अन्याय की मृत्यु का दिन तय करने।

(1855: सिदो-कान्हू की अगुवाई में अन्याय और शोषण के खिलाफ हजारों संथाल आदिवासियों ने तीर-धनुष उठाया था।)


Image: Sido Kanhu

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Jacinta Kerketta

Jacinta is a freelancer journalist, poet from Ranchi, Jharkhand. She belongs to Kurukh/Oraon community. Her poem collection titled "Angor" was published in 2016 by Adivaani Publications. Her second poetry collection is "Land of the Roots" published by Bhartiya Jnanpith, New Delhi in 2018. रांची, झारखंड से, जसिंता एक स्वतंत्र पत्रकार और कवि हैं। वह कुरुख / उरांव समुदाय से हैं। "अंगोर" शीर्षक से इनकी कविता संग्रह 2016 में आदिवाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हुई थी। 2018 में प्रकाशित इनकी दूसरी कविता संग्रह "जड़ों की जमीन" है जो भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई है।

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